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एक थे आर्यभट्ट और एक हैं पुनीत ।


विश्व को जीरो अर्थात शून्य  दिलाने वाला शख्स आर्यभट्ट था।  एक ऐसा गणितज्ञ जिसके शून्य  की बदौलत कभी पृथ्वी से चाँद की दूरी नापी गयी और कभी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के हिसाब चुकता हुए। लेकिन फिर भी देश में छात्रों के मन में हमेशा रहा शून्य का डर। सच कहा जाए तो परीक्षा में हो या सैलरी में, जीरो किसी नंबर के पीछे ही अच्छा लगता है।  और किसी नंबर के पीछे जीरो लगाने के लिए करनी पड़ती है ढेर सारी मेहनत।  
लेकिन हमारा एजुकेशन सिस्टम यानी की शिक्षा व्यवस्था मेहनत से ज़्यादा डराती है। और डराने में सबसे अहम् रोल निभाया है गणित विषय ने ।  

लेकिन कुछ लोग होते हैं  जो बेमतलब नहीं डरते हैं । उन्हीं लोगों में से हैं पुनीत कपूर । एक ऐसे प्रेमी जिन्होंने सिर्फ प्रेम नहीं  किया लेकिन उसे रोज़ जिया । ये प्रेम है गणित विषय से जिसके बारे में थोड़ी देर पहले कहा गया कि इसने छात्रों को डराने में अहम रोल निभाया है । पुनीत कपूर हिमाचल के सुंदर से शहर धर्मशाला से हैं जहां इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही ये बता दिया था कि ये मैथ्स से डरेंगे नहीं बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति सहज करेंगे।  स्कूल में अपने से छोटी क्लास के बच्चों को पढ़ाया और जब ग्यारहवीं में आये तो पाया की उनके मनपसंद विषय गणित का शिक्षक ही नहीं है। लेकिन पुनीत कहाँ मानने वाले थे, इन्होने खुद तो गणित की  पढाई की ही लेकिन अपने साथियों को भी पढ़ाया। बस यहाँ से  अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुनीत के अंदर एक शिक्षक का जन्म कई बरस पहले हो चुका  था। बारहवीं खत्म करते ही पुनीत ने एनडीए का एग्जाम क्लियर किया जिसके बाद घरवालों को बाकी घरवालों की तरह लगा कि अब बेटा अफसर बनेगा लेकिन पुनीत के फिजिक्स के टीचर जानते थे कि  पुनीत एक ऐसा सिपाही बनेगा जो बिना वर्दी पहने १०० और सिपाही बना सकता है। बस अपने शिक्षक के विश्वास की नींव पर पुनीत निकल पड़े इंजीनियरिंग की राह पर। अच्छी खासी नौकरी मिल गयी।  आम लोगों की भाषा में वेल सेटल्ड थे लेकिन अंदर जो शिक्षक था वो बेचैन करता रहता।  और एक रात मन बना लिया कि एमटेक करना है।  पुनीत के फोकस और Strong विलपॉवर के उनके दोस्त भी कायल है और इसी Quality  के साथ पुनीत ने महज 3 महीने की तैयारी में ना सिर्फ BITSAT क्लियर किया बल्कि पूरे भारत में 10वां  स्थान प्राप्त किया। बिट्स से एमटेक करने के बाद पुनीत को फिर बड़ी कंपनियों से लाखों के ऑफर आये।  कुछ वक़्त फिर काम किया। Weekends पर जहाँ लोग पार्टी करने जाते थे वहीँ पुनीत अपने अंदर बसे शिक्षक को जीवित रखने के लिए पढ़ाते।  

लेकिन फिर आया साल 2016 जो लेकर आया उनके जीवन में एक अहम् हिस्सा। इस हिस्से का नाम था Spectrum Eduventres जिसमें शामिल था उनके प्रिय मित्र आयुष भट्ट का सपना। वो सपना जो छात्रों में डर से ज़्यादा उत्साह भरना चाहता है।  जो चाहता है कि छात्र मशीन या प्रोडक्ट ना बनकर सिर्फ एक छात्र बनें जो रोज़ सीखें और ज़िन्दगी के हर कदम पर सिर्फ जीत हासिल करें। बस फिर क्या था अपने आप को इस सपने के साथ जोड़ते हए या खुद अपने सपने को जीने के लिए पुनीत ने छोड़ी लाखों की नौकरी और बन गए Spectrum Eduventres के मैथ्स के हीरो।  

आज पुनीत ने कई छात्रों को अपने मार्गदर्शन से गणित से डरना नहीं बल्कि प्यार करना सिखाया है।  यात्रा जारी है और आप लोगों के प्यार और दुवाओं से बदस्तूर जारी रहेगी।  


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