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शिक्षा के बाज़ार में असली इम्तिहान मां बाप का ।

JEE MAINS Exam   के चार दिनों में हमने  बाकी इंस्टीट्यूट्स की तरह  Spectrum के Vision को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की । इस कवायद में हमने देखे कुछ मां- बाप जो देहरादून के एक्जाम सेंटर पर अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की आस लगाए बैठे तो कुछ खड़े थे । यूं तो सर्दियों की धूप सभी को भाती है लेकिन इंतज़ार की घड़ियों में ये चटक धूप मन को बहुत बेचैन करती हैं । खासकर तब जब आप मां बाप की भूमिका में हो । एक मां पिछले कई घंटों से भारी बस्ता लिए उस एक सेंटर की दीवार पर पीठ टिकाए बैठी थी । नींद के झोंको से जूझती हुई वो अचानक अपना बैग पकड़ लेती । उसे देखकर हमें अपनी बात उस तक पहुंचाने की हिम्मत नहीं हुई इसलिए उसके पास जाकर उसे अपना पैम्पलेट थमाने की बजाय हमने उससे बात करना बहतर समझा । चेहरे की थकान और भारी बैग साफ बता रहा था कि वो कहीं दूर पहाड़ों से सफर करते हुए यहां पहुंची है और उसकी कच्ची नींद इस बात का सबूत थी कि घर की चक्की में पिसने के साथ वो अपने बच्चे के भविष्य संग कई रातें जागी होगी । हम उस महिला के पास गए और उसे पानी की बॉटल थमाई । उसने हल्की सी मुस्कान और झेंप के साथ ...
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मिश्रा सर.. जो करते हैं Chemistry के डर को छूमंतर ।

Spectrum Eduventures की टीम के अगले सदस्य हैं विद्या भूषण मिश्रा जी । एक ऐसे शिक्षक जो आते हैं बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से । एक होनहार छात्र की तरह इन्होंने दसवीं की परीक्षा मे ना सिर्फ अच्छे अंक हासिल किये बल्कि पूरे जिले में तीसरा स्थान हासिल किया। इसी तरह इस रिवायत को बरकरार रखते हुए आपने बारहवीं में एक बार फिर पूरे मुजफ्फरपुर जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया । प्यार से बच्चे और इनके साथी इन्हें  मिश्रा सर कहते हैं और अपने लुभावने अंदाज़ के साथ - साथ,ये छात्रों को लुभाते हैं अपने Chemistry विषय के ज्ञान से । Chemistry से लगाव इन्हें अपने छात्र जीवन से ही था और ये लगाव और  गहरा हुआ जब इन्होंने JEE परीक्षा के दौरान इस विषय में सबसे ज्यादा अंक हासिल किये । खास बात ये कि JEE की परीक्षा इन्होंने Self Study के दम पर की । आज मिश्रा सर एक शिक्षक की भूमिका में हैं । और इस भूमिका में केमिस्ट्री विषय के हीरो हैं । इन्होंने बतौर शिक्षक आज इस भ्रम को तोड़ा है कि केमिस्ट्री विषय में सिर्फ फॉर्म्यूला या फिर कुछ चीजों को रटना होता है । आप Spectrum Eduventures अाएंगे तो पाएंगे कि मि...

एक थे आर्यभट्ट और एक हैं पुनीत ।

विश्व को जीरो अर्थात शून्य  दिलाने वाला शख्स आर्यभट्ट था।  एक ऐसा गणितज्ञ जिसके शून्य  की बदौलत कभी पृथ्वी से चाँद की दूरी नापी गयी और कभी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के हिसाब चुकता हुए। लेकिन फिर भी देश में छात्रों के मन में हमेशा रहा शून्य का डर। सच कहा जाए तो परीक्षा में हो या सैलरी में, जीरो किसी नंबर के पीछे ही अच्छा लगता है।  और किसी नंबर के पीछे जीरो लगाने के लिए करनी पड़ती है ढेर सारी मेहनत।   लेकिन हमारा एजुकेशन सिस्टम यानी की शिक्षा व्यवस्था मेहनत से ज़्यादा डराती है। और डराने में सबसे अहम् रोल निभाया है गणित विषय ने ।   लेकिन कुछ लोग होते हैं  जो बेमतलब नहीं डरते हैं । उन्हीं लोगों में से हैं पुनीत कपूर । एक ऐसे प्रेमी जिन्होंने सिर्फ प्रेम नहीं  किया लेकिन उसे रोज़ जिया । ये प्रेम है गणित विषय से जिसके बारे में थोड़ी देर पहले कहा गया कि इसने छात्रों को डराने में अहम रोल निभाया है । पुनीत कपूर हिमाचल के सुंदर से शहर धर्मशाला से हैं जहां इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही ये बता दिया था कि ये मैथ्स स...

पहाड़ों के हिंदी मीडियम स्कूल से आईआईटी तक का सफर ।

हम सब एक सफर की ओर हैं । फर्क सिर्फ इतना है कि हम में से कुछ लोग जानते हैं कि उन्हें कहाँ पहुंचना है तो कुछ बस बहाव के साथ बहे जा रहे हैं । और फिर आते हैं कुछ एेसे लोग जो सफर भी खुद तय करते हैं और मंजिल भी । एेसे ही शख्स हैं Spectrum Eduventures के Director आयुष भट्ट । जिनका सफर, दरअसल सफर नहीं सपना शुरू होता है पहाड़ों से । सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल से एक छोटा सा सपना किस तरह पनपा और किस तरह पूरे उत्तर प्रदेश में रैंक हासिल करने के बाद गुजरा आईआईटी और एनआईटी के गलियारों में, किस तरह लाखों  की Job और विदेश में settle होने के प्लान को कहा गुड बाय और तमाम तानों और हंसी ठिठोली के बीच सिर्फ रखा खुद पर विश्वास कि पहाड़ों से पलायन नहीं सपने पलेंगे । और आज Spectrum Eduventures के साथ वो ये सपना पूरा कर रहे हैं ।  सन 2014 में Spectrum Eduventures की नींव पड़ी। ये वो वक़्त था जब लाखों का पैकेज पा रहे आयुष भट्ट ज़िन्दगी को स्टेबल बना चुके थे। और बाकी लोगों की तरह सुकून की ज़िन्दगी जी रहे थे। लेकिन जैसे कि पहले कहा जा चुका है कुछ लोग अपना सफर खुद तय करते हैं और मंज़िल भी।  तो बस इसी थ्...